Posts
राइटर की मौत
- Get link
- X
- Other Apps
सिनेमा 100 से ज्यादा साल पुराना है, नौटंकी, ड्रामा, स्वांग उससे भी ज्यादा पुराने हैं, किताबें और भी ज्यादा, और ग्रन्थ तो सबसे ही ज्यादा पुराने हैं | लेकिन इन सब में आप जानते हैं कोमन क्या है ? राइटिंग, लेखनी | लेखक, जिसे हिंदुस्तान में सबसे कम इज्ज़त मिलती है | हर ऐरे गेरे नत्थू खेरे को लगता है कि वो लिख सकता है | जावेद अख्तर, सलीम और गुलज़ार से पहले शायद गणेश जी ही ऐसे राइटर थे, जिनको 100 % क्रेडिट और पूरा नाम मिला हो | वरना पैसा छोडिये जनाब यहाँ तो क्रेडिट के लिए भी लड़ना पड़ता है हमारे यहाँ राइटर भीड़ में अलग देखे जा सकते हैं, दाढ़ी बढ़ी हुई, गन्दा सा खादी का कुरता, लम्बा सा बैग, दिल में कुछ क्रन्तिकारी लिख के भूचाल ला देने वाले ख्याल और दिमाग में घूमता पैसा | अब किताबें तो नहीं खा सकता न | *क्या ??? राइटर को भी पैसा चाहिए ??? कैसी बातें करते हो? पहली बार सुना है | जी हाँ राइटर का भी परिवार होता है, जहाँ के बीवी बच्चे होते हैं, माँ बाप होते हैं भाई बहिन भी, और सबके भगवान ने एक पेट फिट करके भेजा है, जो रोटी मांगता है | उसके भी बिजली, पानी, फ़ोन, टीवी, पेट्...
मेरी बेटी
- Get link
- X
- Other Apps
वो मेरे हाथो में रुई जैसी नाज़ुक होगी मुस्कराहट उसकी , मेरी इबादत जैसी होगी उसके छोटे और नाज़ुक घुटने जब चलेंगे , मेरे घर की खुरदुरी ज़मीन पे तब मेरा एक सपना बड़ा हो रहा होगा वो कई रातें मेरे सीने पे सो के गुज़ार देगी मेरी परी मुझसे परियो की कहानी सुनेगी ! वो देखो , मेरे काँधे पे सोया हुआ उसका मासूम , सच्चा चेहरा उसकी छोटी छोटी उंगलियो के सवालो का क्या जवाब दूंगा की क्यों नही जीने दिया मेने इस समाज में।।।
आज के मुख्य समाचार 16 सितम्बर 2015 "मुन्नी क्यूँ बदनाम हुई"
- Get link
- X
- Other Apps
मुन्नी बदनाम हुई आज कल मुन्नी बदनाम हो रही है बदनामी का भी अपना मज़ा है. बदनाम होने के लिए भी काफ़ी मशक्कत करनी पड़ती है.यु ही बदनाम होना हर किसी की किस्मत मे नही होता. नसीब वेल होते है वो जो बदनाम हो सके है थोड़े से भी ..क्योंकि बदनामी मे भी उतना ही नाम होता है जितना नाम वालो का होता है . अगर आपके हाथो मे कुछ विशेष प्रकार की रेखाए पसरी हुई है ,अगर आपने कुछ अव्वल दर्जे के हहूदे काम किया है तो बदनामी की शुरुआत हो सकतीहै. अगर शहर की राते ,सुनसान सड़के आपको जानती है.तो आप बदनामी की सस्ती वाली कुलफी खा सकते है .महनगी वाली कुलफी के लिए कर्म करो. ... फिर एक अदद डार्लिंग चाहिए जिसके लिए मुन्नी बदनाम होगी .मुन्नी का अपना लेवल है वो सिर्फ़ उँचे लोगो के लिए बदनाम होती है.जहा गारंटी है की बदनामी तो पक्की होगी आपके ओर मेरे जेसे लोगो के बस की बात नही मुन्नी को बदनाम करना . वेसे तो मुन्नी को साजन भी मिल सकता था कोई राँझा भी मुन्नी को बदनाम कर सकता है.वो दम हिंदी में कहा .? इंग्लिश की गली में वेसे भी हिंदी ने खुद को अल्पसंख्यक ही समझा है. थोड़ी से हिंदी ...
आज के मुख्य समाचार 16 sept 2015
- Get link
- X
- Other Apps
मछली जल की रानी है जीवन उसका पानी है / जल है तो सब राजा है ,जल है तो रानी है /दीवारों पे ,तख्तियो पे होर्डिंग्स पे लिखा होता है :- जल बिन सब सून .मेने इसके आगे एक लाइन जोड़ दी...की जल बिन सब सून ...क्या धरती क्या मून ? !! चाँद पे,मंगल पे ज़िन्दगी ढूंढने के लिए भी पहले पानी ढूंढा जा रहा है की भाई वह पानी मिले तो प्लाट काटने का टेंडर निकले !!पानी मिले तो धरती से बिल्डर को भेज चाँद पे मल्टीप्लेक्स बनवाए !! एक बार पानी मिल जाये चाँद पे ,मल्टीप्लेक्स तो हम बनवा देंगे पानी इतना जरुरी है....कहते है तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो पानी के लिए होगा..पर बेंगलुरु की एक अम्मा जी ने पिछले ७८ सालो से पानी नहीं पिया..लो जी तीसरे विश्वयुद्ध की सम्भंवाना जड़ से ही ख़त्म कर दी!! कोई बात नहीं अब कोई और कारन ढूंढ़ लेंगे ..तीसरा विश्वयुद्ध के लिए एक कारण ही तो चाहिए,मिल जायेगा!! कोनसा रामगोपाल वर्मा की फिल्मो के लिए दर्शक चाहिए, जो पाताल में ढूढने पे नहीं मिलेंगे!! मैं बार बार अपने विषय से हट जा रहा हूँ ! अब ९२ साल की अम्मा हो ,७८ सालो से पानी नहीं पिया ,,ये विषय होगा तो हटना बनता है!! मल्लिका शेरावत ७८ घंटे भी ब...
गलत आदेश हो गया..
- Get link
- X
- Other Apps
केंसर के साथ सुर ताल न बैठ पाने के कारण आदेश श्रीवास्तव दुनिया के मंच से विदा हुए | मध्य प्रदेश के जबल पुर में पैदा हुआ ये संगीतकार अपने आखिरी पालों में अपनों के रूखे व्यवहार से दुखी था...दुनिया यही है...यही रीत है |उनकी पत्नी के आँखों के आंसू सूख गए थे | राजनीति का न भूल पाने वाला म्यूजिक बनाने वाले आदेश किस राजनीति का शिकार हुए | क्या हजारो करोडो की कमाई करने वाली इंडस्ट्री उनके इलाज का खर्चा नहीं उठा सकती थी | यहाँ लाखो मौसिकीकार है, किसी के आने या जाने से आज तक दुनिया ने चलना नहीं छोड़ा, लेकिन पूछिए उस पत्नी से या बच्चो से जिनकी दुनिया अब कैसे चलेगी, शायद वो भी नहीं जानते | आदेश पहले नहीं थे, जिनको इंडस्ट्री ने भूला दिया, इससे पहले भी कई कलाकार शाम का उतरता सूरज बने है | मीडिया ने आदेश की खबर भी सिर्फ इसीलिए दिखाई क्युकी शाहरुख खान और ऐश्वर्या उनसे मिलने गए | आज के बाद मीडिया को नए आदेश कि ज़रूरत होगी जिस पर खबरों का तवा गरम रख सकें.... आदेश संगीत बनाते रहना...जहाँ भी रहो..