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एक चादर में लिपटे दो बदन * तेरी चांदनी में नहाऊं मैं और हर तरफ बस अंधेरा हो, एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो तेरे मखमली बदन में,खुशबुऒं के चमन में सदियों तक वो रात चले,सदियों दूर सवेरा हो एक चादर में लिपटे दो बदन , एक तेरा हो एक मेरा हो तेरे होठों को सिल दूं मैं अपने होठों के धागे से एक सन्नाटे में खामोशी से, तेरी बाहों ने मुझको घेरा हो एक चादर में लिपटे दो बदन, क तेरा हो और एक मेरा हो दोनों लिपटें एक दूजे से, गांठ सी लग जाए बदनों में मेरे जिस्म में घर मिल जाए तुझे, तेरे जिस्म में मेरा बसेरा हो एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो आज मन कहता है कि कुछ ऐसा हो, तू बन जाए मैं , मैं बन जाऊं तू बिस्तर पे तेरे मेरे सिवा,सिर्फ ज़ुनून और खामोशी का डेरा हो एक चादर में लिपटे दो बदन, एक तेरा हो और एक मेरा हो
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तुमसे दो बातें करने को मेरा दिल हरदम प्यासा है हम आज मिले या कल मिले पल पल मिलना प्रत्याशा है तुमसे सुन्दर तुमसे प्यारा विधि ने तो कोई रचा नहीं गर हो इस ज़मीं पर तो मेरी आँखों को जांचा नहीं वो ज्योत जलाएं रखना तुम वो प्रेम निहित परिभाषा है तुमसे दो बातें करने को .................