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राइटर की मौत
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सिनेमा 100 से ज्यादा साल पुराना है, नौटंकी, ड्रामा, स्वांग उससे भी ज्यादा पुराने हैं, किताबें और भी ज्यादा, और ग्रन्थ तो सबसे ही ज्यादा पुराने हैं | लेकिन इन सब में आप जानते हैं कोमन क्या है ? राइटिंग, लेखनी | लेखक, जिसे हिंदुस्तान में सबसे कम इज्ज़त मिलती है | हर ऐरे गेरे नत्थू खेरे को लगता है कि वो लिख सकता है | जावेद अख्तर, सलीम और गुलज़ार से पहले शायद गणेश जी ही ऐसे राइटर थे, जिनको 100 % क्रेडिट और पूरा नाम मिला हो | वरना पैसा छोडिये जनाब यहाँ तो क्रेडिट के लिए भी लड़ना पड़ता है हमारे यहाँ राइटर भीड़ में अलग देखे जा सकते हैं, दाढ़ी बढ़ी हुई, गन्दा सा खादी का कुरता, लम्बा सा बैग, दिल में कुछ क्रन्तिकारी लिख के भूचाल ला देने वाले ख्याल और दिमाग में घूमता पैसा | अब किताबें तो नहीं खा सकता न | *क्या ??? राइटर को भी पैसा चाहिए ??? कैसी बातें करते हो? पहली बार सुना है | जी हाँ राइटर का भी परिवार होता है, जहाँ के बीवी बच्चे होते हैं, माँ बाप होते हैं भाई बहिन भी, और सबके भगवान ने एक पेट फिट करके भेजा है, जो रोटी मांगता है | उसके भी बिजली, पानी, फ़ोन, टीवी, पेट्...