मेरी बेटी
वो मेरे हाथो में रुई जैसी नाज़ुक होगी मुस्कराहट उसकी , मेरी इबादत जैसी होगी उसके छोटे और नाज़ुक घुटने जब चलेंगे , मेरे घर की खुरदुरी ज़मीन पे तब मेरा एक सपना बड़ा हो रहा होगा वो कई रातें मेरे सीने पे सो के गुज़ार देगी मेरी परी मुझसे परियो की कहानी सुनेगी ! वो देखो , मेरे काँधे पे सोया हुआ उसका मासूम , सच्चा चेहरा उसकी छोटी छोटी उंगलियो के सवालो का क्या जवाब दूंगा की क्यों नही जीने दिया मेने इस समाज में।।।